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यू.के हिंदी सम्मान समारोह

प्रेस विज्ञप्ति 

विश्व हिन्दी दिवस, 2015 के उपलक्ष्य में, भारतीय उच्चायोग, लंदन द्वारा यू.के हिंदी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया जिसमें हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में शामिल कुछ चुनिंदा लोगों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन 05 दिसंबर, 2014 को इण्डिया हाउस के गांधी हाल में किया गया। ब्रिटेन के विभिन्न भागों से बडी संख्या में पधारे हिंदी प्रेमियों का स्वागत करते हुए मंत्री(समन्वय)श्री सुखदेव सिंह सिद्धू ने हिंदी के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान की सराहना की।

महामहिम उच्चायुक्त श्री रंजन मथाई द्वारा निम्नलिखित चार श्रेणि‍यों के अन्‍तर्गत सम्‍मान दि‍ए गये: हि‍न्‍दी शि‍क्षक, हि‍न्‍दी लेखक, हि‍न्‍दी मीडि‍या और हि‍न्‍दी की स्‍वयंसेवी संस्‍थाएं।  

1.  जॉन गिलक्रिस्ट यू.के.हिन्दी शिक्षण सम्मान- सुश्री जे.आस्टिन एवं सुश्री देविना ऋषि

2. डा॰ हरिवंश राय बच्चन यू.के.हिन्दी साहित्य सम्मान- श्री सोहन राही और श्रीमती कविता       वाचक्नवी  

3. आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी पत्रकारिता सम्मान- श्री रवि शर्मा और सुश्री शिखा वार्ष्णेय

4. फ़्रेडरिक पिंकोट यू.के.हिन्दी प्रचार सम्मान- काव्य धारा और वातायन

इस अवसर पर बोलते हुए उच्चायुक्त महोदय ने यू.के.में हिन्दी को बढावा देने की दिशा में उच्चायोग द्वारा किये जा रहे कार्यों का उल्लेख किया और विशेष रूप से उन शिक्षकों की सराहना की जो बिना किसी आर्थिक लाभ के स्कूलों, मंदिरों और सामुदायिक स्तर पर हिंदी पढा रहे हैं।

साथ ही साथ भारत के उप-उच्चायुक्त श्री वीरेन्द्र पॉल द्वारा डा लक्ष्मी मल्ल सिंघवी साहित्य अनुदान योजना के अंतर्गत हिंदी पुस्तकों के प्रकाशन हेतु निम्नलिखित लेखको को 250 पौंड की राशि अनुदान स्वरूप प्रदान की गयी:

1. 'बसेरा' कहानी संग्रह के लिये श्रीमती शैल अग्रवाल को

2. सपने मरते नहीं' कहानी संग्रह के लिये श्री तेजेन्द्र शर्मा को

3. 'सांकल' कहानी संग्रह के लिये श्रीमती ज़क़िया ज़ुबेरी को

4. 'मौन मुखर जब' काव्य संग्रह के लिये श्रीमती वंदना मुकेश को

प्रत्येक वर्ष, 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है परन्तु विश्व हिन्दी दिवस के कार्यकलाप कुछ दिन पहले से और कुछ दिन आगे तक जारी रहते हैं। 5 दिसंबर को आयोजित यह  समारोह इन्हीं कार्यकलापों की एक कडी थी। विश्व हिंदी दिवस को य़ादगार बनाने के लिए भारतीय उच्चायोग, लंदन ने चार हिंदी सम्मान देने की परम्परा शुरू की जिसका अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर स्वागत किया गया। जि‍न चार श्रेणि‍यों के अन्‍तर्गत ये सम्‍मान दि‍ए जाते हैं वे हैं : हि‍न्‍दी शि‍क्षक, हि‍न्‍दी लेखक, हि‍न्‍दी मीडि‍या और हि‍न्‍दी की स्‍वयंसेवी संस्‍थाएं। साथ ही साथ उच्चायोग ने दो हिंदी पुस्तकों को प्रकाशन अनुदान देने की भी योजना शुरू की जिसमें 250 पौंड की राशि अनुदान स्वरूप दी जाती है। इसे डा लक्ष्मी मल्ल सिंघवी साहित्य अनुदान योजना के नाम से जाना जाता है।

भारत और ब्रि‍टेन के लगभग चार सौ साल पुराने संबंधों को नई मजबूती देने के लि‍ए और यह देखते हुए कि‍ ब्रि‍टेन के अनेकों वि‍द्वानों ने भी हि‍न्‍दी की बडी सेवा की है, चार में से दो सम्‍मानों के नाम ब्रि‍टेन के हि‍न्‍दी सेवि‍यों और शेष दो सम्‍मानों के नाम भारत के हि‍न्‍दी साहि‍त्‍यकारों के नाम पर रखे गए । वर्ष 2007 में जब पहली बार ये सम्‍मान दि‍ए गए तो वह वर्ष प्रसिद्द कवि‍ श्री हरि‍वंश राय बच्‍चन का जन्‍म शताब्‍दी वर्ष भी था इसलि‍ए हि‍न्‍दी लेखन सम्‍मान उनके नाम पर; हिन्दी की मौलिक पत्रि‍का सरस्‍वती के सम्पादक के रुप में भारत में हि‍न्‍दी पत्रकारिता को नया आयाम देने आचार्य महावीर प्रसाद द्वि‍वेदी के नाम पर हि‍न्‍दी पत्रकारि‍ता सम्‍मान; कलकत्ता में रॉयल एशि‍याटि‍क सोसाइटी के माध्‍यम से हि‍न्‍दी शि‍क्षण को नयी राह दि‍खाने वाले श्री जॉन गि‍लक्रि‍स्‍ट के नाम पर हि‍न्‍दी शि‍क्षण सम्‍मान और जीवन भर ब्रि‍टेन में हि‍न्‍दी के लि‍ए संघर्ष करने वाले और  लखनऊ में अंति‍म सांस लेने वाले श्री फ्रैडरि‍क पि‍न्‍कॉट के नाम पर हि‍न्‍दी प्रचार प्रसार सम्‍मान का नामकरण कि‍या गया।

उल्लेखनीय है कि भारतीय उच्चायोग, लंदन दुनियां में भारत का एकमात्र मिशन है जिसके द्वारा स्थानीय हिन्दी सेवियों और संस्थाओं को सम्मानित किया जाता है और पुस्तक प्रकाशन हेतु इस प्रकार का प्रोत्साहन दिया जाता है।

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