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कथा यू.के. एवं प्रवासी संसार सम्मेलन, लंदन में प्रस्ताव पारित

“जब तक हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा ना बन जाए, देवनागरी में लिखी जाने वाली किसी भी बोली को संविधान की आठवीं सूचि में शामिल ना किया जाए। इस मामले में यथास्थिति बनाई रखी जाए।”

17 नवम्बर 2016 ब्रिटेन की संसद के हाउस ऑफ़ कॉमन्स में तीन दिवसीय प्रवासी सम्मेलन के पहले दिन कथा यू.के. ने प्रवासी संसार पत्रिका के एक दशक पूरा होने का जश्न मनाया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि थी गोवा की राज्यपाल महामहिम श्रीमती मृदुला सिन्हा। मेज़बान एवं अध्यक्ष विरेन्द्र शर्मा (ब्रिटिश सांसद)। मंच पर मौजूद थे भारत से श्री किशोरी लाल शर्मा, भारतीय उच्चायोग के श्री सुनील कुमार, काउंसलर ज़किया ज़ुबैरी (अध्यक्ष – एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स), सन्मुख सिंह बख़्शी (अध्यक्ष – काव्यधारा), जय वर्मा (अध्यक्ष – काव्यरंग), राकेश पाण्डेय (संपादक – प्रवासी संसार)।

कार्यक्रम के दौरान ब्रिटेन में सक्रिय संस्थाओं, अध्यापकों, लेखकों आदि को सम्मानित किया गया। इनमें  प्रो. डॉ. कृष्ण कुमार (गीतांजलि), दिव्या माथुर (वातायन), रवि शर्मा (मीडिया), कैलाश बुधवार (मीडिया), श्याम मनोहर पाण्डेय, देविना ऋषि, सुरेखा चोपला, डॉ. अरुणा अजितसरिया एम.बी.ई., गीता शर्मा (सभी शिक्षण), सोहन राही, निखिल कौशिक, अरुणा सब्बरवाल, स्वर्ण तलवाड़, तोषी अमृता, इंदिरा आनन्द, शिखा वार्ष्णेय, एवं अनुपमा कुमारज्योति शामिल थे।

राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा ने कथा यू.के. एवं प्रवासी संसार पत्रिका को आयोजन के लिये बधाई देते हुए पत्रिका के 10 वर्ष के इतिहासिक योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने आयोजन स्थल यानि कि ब्रिटेन की संसद के सभागार के महत्व को रेखांकित किया व सांसद विरेन्द्र शर्मा को धन्यवाद दिया।

कार्यक्रम की शुरूआत में काउंसलर ज़किया ज़ुबैरी ने गोवा की राज्यपाल, भारत से पधारे अतिथियों एवं उपस्थित मेहमानों का स्वागत करते हुए प्रवासी संसार की दशकीय यात्रा का ज़िक्र किया। पत्रिका के संपादक श्री राकेश पाण्डेय ने नॉस्टेलजिक होते हुए भावपूर्ण ढंग से पत्रिका से जुड़े लोगों को याद किया। श्री किशोरी लाल शर्मा ने घोषणा करते हुए कहा कि अगला सम्मेलन टोरोंटो (कनाडा) में आयोजित करने की योजना है।

भारतीय उच्चायोग के चांसरी प्रमुख श्री सुनील कुमार ने कार्यक्रम की भव्यता की तारीफ़ करते हुए इस बात पर संतोष जताया कि कार्यक्रम से ब्रिटेन के हिन्दी जगत के सभी प्रमुख नाम जुड़े हैं। उच्चायोग के हिन्दी एवं संस्कृति अधिकारी श्री तरुण कुमार भी कार्यक्रम में मौजूद थे। लंदन के अतिरिक्त वेल्स, बरमिंघम, नॉटिंघम जैसे शहरों से भी अतिथियों ने कार्यक्रम में शिरकत की।

कथाकार तेजेन्द्र शर्मा (महासचिव – कथा यू.के.) ने प्रवासी संसार के दशक पूरा होने पर एक पॉवर पाइण्ट प्रेज़ेन्टेशन करते हुए राकेश पाण्डेय की प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। उन्होंने तमाम सम्मानित हिन्दी सेवियों का परिचय भी पॉवर पॉइण्ट प्रेज़ेन्टेशन के ज़रिये दिया। अंत में उन्होंने एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया – “जबतक हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा ना घोषित कर दिया जाए, तब तक देवनागरी में लिखी जाने वाली किसी भी हिन्दी की बोली को शामिल ना किया जाए, यथास्थिति बनाए रखी जाए।”

 

प्रवासी साहित्य : दशा और दिशा

 

प्रवासी संसार पत्रिका के 10 वर्ष पूरा होने के अवसर पर कथा यूके और प्रवासी संसार के तत्वाधान में आयोजित सम्मेलन के दूसरे दिन यानी 18-11-2016 को लंदन स्थित नेहरू सेंटर में “प्रवासी साहित्य : दशा और दिशा” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार के आरंभ में लंदन के वरिष्ठ कथाकार श्री तेजेंद्र शर्मा ने वहां उपस्थित सभी श्रोताओं का स्वागत करते हुए कहा कि साहित्य और फिल्मों का गहरा रिश्ता है। उन्होंने लंदन के जानेमाने पत्रकार और फिल्म निर्माता श्री निखिल कौशिक द्वारा निर्मित फिल्म भविष्य द फ्यूचर के कुछ दृश्यों को दर्शाया। उसके बाद इस सेमिनार के लिए विशेष रूप से वाराणसी से पधारी सुश्री महालक्ष्मी केशरी को इस विषय पर अपना पेपर पढ़ने के लिए आमंत्रित किया गया। उन्होंने प्रवासी संसार में रचे जा रहे साहित्य की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि गंगा की अजस्र धारा के समान प्रवासी साहित्य बह रहा है और जब इसकी दशा इतनी अच्छी है तो दिशा तो अच्छी होनी है। उन्होंने अमेरिका] मॉरीशस] फिजी, गयाना ] सूरीनाम ] ब्रिटेन आदि देशों में रचे जा रहे साहित्य] इसकी संवेदनाओं और मूल्यों का भी विस्तार से उल्लेख किया। इस अवसर पर अपनी राय व्यक्त करते हए श्री तेजेंद्र शर्मा ने कहा कि मैं उन लोगों को प्रवासी साहित्यकार नहीं मानता जिनका जन्म उनके पूर्वजों द्वारा अपनाए गए देश में हुआ। इस दृष्टि से मैं अभिमन्यू अनत को प्रवासी साहित्यकार नहीं मानता क्योंकि उनका जन्म मॉरीशस में हुआ और इसलिए उन्होंने अपनी रचनाओं में उस देश के नागरिक के समान अपनी अनुभूतियों को रखा है। उनका रचना संसार भारत की जमीन से जुड़ा नहीं बल्कि अपने देश से जुड़ा है और इसलिए वे मॉरीशस के हिंदी साहित्यकार कहे जा सकते हैं न कि प्रवासी लेखक। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रवासी संसार पत्रिका के संपादक ने कहा कि मैं इससे सहमत नहीं हूं क्योंकि वे प्रवास में रहकर हिंदी में साहित्य सृजन कर रहे हैं और उनकी रचनाओं से भी भारत की माटी की खूशबू आती है। इस अवसर पर लंदन के बीबीसी हिंदी सेवा से जुड़े रहे वरिष्ठ पत्रकार श्री कैलाश बुधवार ने कहा कि हिंदी की स्थिति चिंतनीय है क्योंकि आजकल बच्चे घरों में भी हिंदी में बात नहीं करते हैं। उनसे बात करनी है तो अंग्रेजी में करनी पड़ती है। भारत का उच्चायोग] लंदन की ओर से अताशे (हिंदी और संस्कृति) श्री तरुण कुमार ने इस अवसर पर अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बेशक प्रवासी दुनिया में रचे जा रहे हिंदी साहित्य में कमी आई हो लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक भाषा के रूप में हिंदी बोलने और समझने वालों की संख्या विगत कुछ वर्षों में बढ़ी है। निस्संदेह इसमें बाजार की भी बड़ी भूमिका रही है जिनमें हिंदी फिल्में भी शामिल हैं। यह उम्मीद की जानी चाहिए कि आनेवाले समय में हिंदी बोलने और समझनेवालों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। अंत में इस आशय का प्रस्ताव पारित किया गया कि भारत सरकार से यह अनुरोध किया जाए कि जब तक हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा प्राप्त हो नहीं जाता] देवनागरी में लिखी जाने वाली किसी भी बोली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के संबंध में यथास्थिति बनाई रखी जाए] इसमें हिंदी की और कोई बोली अभी शामिल नही की जाए। 

 

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